
Chapter 3 | 2 min read
पीक फेज़ (peak phase)
पिछले चैप्टर (chapter) में, हमने इकोनॉमिक साइकल (economic cycle) के एक्सपेंशन फेज (expansion phase) पर संक्षेप में चर्चा की थी।

अब, आर्थिक चक्र के एक और चरण की ओर बढ़ते हुए, पीक फेज (peak phase)।
जैसा कि नाम से पता चलता है, पीक फेज आर्थिक चक्र का सबसे ऊँचा बिंदु है, जो अधिकतम उत्पादन, रोजगार, और अक्सर, इन्फ्लेशन (inflation) द्वारा चिह्नित होता है। यह आर्थिक विस्तार की अवधि का अंत होता है।
विस्तार बढ़ते विकास द्वारा चिह्नित होता है, जबकि पीक फेज वह बिंदु दर्शाता है जब विकास अपनी अधिकतम क्षमता पर पहुंच जाता है। यह संकुचन और ट्रफ (trough) फेज के विपरीत है, जिनमें अर्थव्यवस्था धीमी हो जाती है और अंततः पुनः सुधार शुरू होता है।
पीक फेज के संकेतक:
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आर्थिक विकास (Economic Growth): अर्थव्यवस्था का ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) अपने पीक स्तर पर पहुंच गया है और अब स्थिर होने या धीमा होने के संकेत दिखा सकता है।
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बेरोजगारी दर (Unemployment Rate): पीक फेज के दौरान, आमतौर पर बेरोजगारी सबसे कम होती है, और जो लोग नौकरी चाहते हैं, वे आमतौर पर कार्यरत होते हैं।
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उपभोक्ता विश्वास और खर्च (Consumer confidence and spending): उपभोक्ता विश्वास वर्तमान में उच्च है, जिसके कारण मजबूत और निरंतर खर्च होता है। उपभोक्ता खर्च में यह वृद्धि समग्र आर्थिक विकास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण होती है।
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इन्फ्लेशन और ब्याज दरें (Inflation and interest rates): जब मांग आपूर्ति से अधिक होती है, तो इन्फ्लेशन रेट्स (inflation rates) बढ़ सकते हैं। इन्फ्लेशन को प्रबंधित करने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक जैसी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ाने का विकल्प चुन सकती है।
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स्टॉक मार्केट प्रदर्शन (Stock market performance): उच्च स्टॉक मार्केट वैल्यूएशन्स (valuations) अक्सर मजबूत कॉर्पोरेट अर्निंग्स (earnings) और सकारात्मक इन्वेस्टर सेंटीमेंट (investor sentiment) के कारण होती हैं।
पीक फेज के कारण:
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मांग का आपूर्ति से अधिक होना (Demand outstripping supply): जब उपभोक्ताओं और व्यवसायों की मांग अर्थव्यवस्था की क्षमता से अधिक होती है, तो यह आर्थिक गतिविधि के पीक में परिणत होता है। सरल शब्दों में, जब मांग आपूर्ति से अधिक होती है, तो यह आर्थिक गतिविधि के पीक में परिणत होता है।
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उपभोक्ता और व्यावसायिक खर्च (Consumer and business spending): अर्थव्यवस्था उपभोक्ता और व्यावसायिक खर्च में वृद्धि का अनुभव करती है, दोनों सेक्टर अर्थव्यवस्था की स्थिरता और विकास में अपने विश्वास के कारण महत्वपूर्ण निवेश करते हैं।
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मार्केट का संतृप्त होना (Saturation of the market): मार्केट का संतृप्त होना तब होता है जब अधिकांश उपभोक्ताओं ने पहले ही टिकाऊ सामान खरीद लिए होते हैं, जिससे नई मांग में कमी और मार्केट गतिविधि में मंदी आती है।
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केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीति उपाय (Monetary policy measures by central banks): केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि का विकल्प चुन सकते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था अत्यधिक गर्म होने से बच सके, जिससे निवेश और खर्च में कमी हो सकती है।
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