

Chapter 4 | 2 min read
इंटरेस्ट रेट रिस्क (interest rate risk) और इसका प्रबंधन
कल्पना करो कि आपने अपने दोस्त को एक फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट (fixed interest rate) पर पैसे उधार दिए हैं। अब, अगर मार्केट इंटरेस्ट रेट (market interest rates) बढ़ते हैं, तो नए लेंडर्स (lenders) उच्च रिटर्न्स (higher returns) ऑफर करते हैं, जिससे आपका फिक्स्ड-रेट लोन (fixed-rate loan) कम आकर्षक हो जाता है। यह स्थिति इंटरेस्ट रेट रिस्क (interest rate risk) को दर्शाती है — यह रिस्क कि इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) में बदलाव फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट्स (fixed income investments) के मूल्य को प्रभावित करेंगे।
इंटरेस्ट रेट रिस्क (Interest Rate Risk) क्या है?
इंटरेस्ट रेट रिस्क (interest rate risk) वह रिस्क है कि एक बांड (bond) या अन्य फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटी (fixed income security) का मूल्य प्रचलित इंटरेस्ट रेट्स (prevailing interest rates) में बदलाव के कारण घट-बढ़ सकता है। जब इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) बढ़ते हैं, तो बांड की कीमतें गिरती हैं, और इसके विपरीत। यह इनवर्स रिलेशनशिप (inverse relationship) मौजूदा बांड्स (existing bonds) और मार्केट में नई इश्यूज (new issues) को प्रभावित करता है।
इंटरेस्ट रेट रिस्क (Interest Rate Risk) इन्वेस्टर्स (Investors) को कैसे प्रभावित करता है?
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प्राइस फ्लक्चुएशन्स (Price Fluctuations): जब इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) बढ़ते हैं, तो कम कूपन रेट्स (lower coupon rates) वाले मौजूदा बांड्स (existing bonds) कम आकर्षक हो जाते हैं, जिससे उनके मार्केट प्राइसेस (market prices) में गिरावट आती है। इसके विपरीत, गिरते इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) बांड प्राइसेस (bond prices) को बढ़ाते हैं।
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रीइन्वेस्टमेंट रिस्क (Reinvestment Risk): जब इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) गिरते हैं, तो इन्वेस्टर्स (investors) को कूपन पेमेंट्स (coupon payments) या मैच्योर प्रिंसिपल (matured principal) को कम रेट्स (lower rates) पर रीइन्वेस्ट (reinvest) करना पड़ सकता है, जिससे ओवरऑल रिटर्न्स (overall returns) में कमी आती है।
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पोर्टफोलियो पर प्रभाव (Impact on Portfolio): इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) में बदलाव एक फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो (fixed income portfolio) के टोटल रिटर्न (total return) को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे इनकम (income) और कैपिटल गेंस (capital gains) या लॉसेस (losses) पर असर पड़ता है।
इंटरेस्ट रेट रिस्क (Interest Rate Risk) का प्रबंधन:
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ड्यूरेशन मैनेजमेंट (Duration Management): ड्यूरेशन (duration) एक बांड की इंटरेस्ट रेट चेंजेस (interest rate changes) के प्रति संवेदनशीलता को मापता है। पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन (portfolio’s duration) को एडजस्ट करके — या तो इसे कम करके रिस्क (risk) को घटाना या इसे बढ़ाकर संभावित रिटर्न्स (potential returns) को बढ़ाना — इन्वेस्टर्स (investors) इंटरेस्ट रेट एक्सपोजर (interest rate exposure) को मैनेज कर सकते हैं।
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डाइवर्सिफिकेशन (Diversification): विभिन्न मैच्योरिटीज (maturities) और कूपन्स (coupons) के बांड्स (bonds) का मिक्स होल्ड करना इंटरेस्ट रेट रिस्क (interest rate risk) को बैलेंस (balance) करने में मदद कर सकता है।
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डेरिवेटिव्स का उपयोग (Use of Derivatives): इंटरेस्ट रेट स्वैप्स (interest rate swaps), फ्यूचर्स (futures), और ऑप्शन्स (options) इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) में प्रतिकूल मूवमेंट्स (adverse movements) के खिलाफ हेज (hedge) कर सकते हैं।
उदाहरण:
मान लो आपके पास 5 साल की मैच्योरिटी (maturity) और 4 साल की ड्यूरेशन (duration) वाला एक बांड है। अगर इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) 1% बढ़ते हैं, तो बांड की कीमत लगभग 4% गिर सकती है। पोर्टफोलियो ड्यूरेशन (portfolio duration) को घटाकर, आप रेट्स (rates) बढ़ने पर लॉसेस (losses) को सीमित कर सकते हैं।
भारत में, आरबीआई (RBI) की मौद्रिक नीति (monetary policy) के निर्णय इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) को मजबूत रूप से प्रभावित करते हैं। फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टर्स (fixed income investors) इन परिवर्तनों को बारीकी से मॉनिटर (monitor) करते हैं ताकि अपने पोर्टफोलियो (portfolio) को उसी अनुसार समायोजित कर सकें। उदाहरण के लिए, एक रेपो रेट हाइक (repo rate hike) आमतौर पर उच्च बांड यील्ड्स (bond yields) और कम प्राइसेस (prices) की ओर ले जाता है।
इंटरेस्ट रेट रिस्क (interest rate risk) फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टर्स (fixed income investors) के लिए एक मौलिक विचार है। ड्यूरेशन (duration) और डाइवर्सिफिकेशन (diversification) जैसे टूल्स (tools) के माध्यम से इस रिस्क (risk) को समझना और प्रबंधित करना इन्वेस्टमेंट्स (investments) को मार्केट फ्लक्चुएशन्स (market fluctuations) से बचाने में मदद करता है। अगले अध्याय में, हम फिक्स्ड इनकम मार्केट पार्टिसिपेंट्स (Fixed Income Market Participants) — इस महत्वपूर्ण मार्केट को आकार देने वाले प्रमुख खिलाड़ियों की खोज करेंगे।
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