

Chapter 3 | 2 min read
ट्रेजरी बिल्स (Treasury Bills)
कल्पना करो कि तुम सरकार को कुछ समय के लिए पैसा उधार देते हो, जैसे 91 दिन के लिए, और अंत में सरकार तुम्हें थोड़ा अधिक पैसा वापस देती है जितना तुमने उधार दिया था। तुम्हें समय-समय पर ब्याज नहीं मिलता; बल्कि, तुम्हारी कमाई उस राशि के अंतर से होती है जो तुमने उधार दी और जो तुम्हें वापस मिली। यही ट्रेजरी बिल्स (Treasury Bills - T-Bills) का बुनियादी सिद्धांत है — ये अल्पकालिक सरकारी ऋण उपकरण होते हैं जो अल्पकालिक तरलता आवश्यकताओं को प्रबंधित करते हैं।
ट्रेजरी बिल्स क्या होते हैं? (What Are Treasury Bills?)
ट्रेजरी बिल्स अल्पकालिक ऋण उपकरण होते हैं जो सरकार द्वारा एक वर्ष से कम की परिपक्वता के साथ जारी किए जाते हैं। बॉन्ड्स के विपरीत, टी-बिल्स नियमित ब्याज (कूपन) का भुगतान नहीं करते। इसके बजाय, इन्हें उनके फेस (पर) वैल्यू से कम कीमत पर बेचा जाता है, और निवेशक परिपक्वता पर फेस वैल्यू प्राप्त करता है। खरीद मूल्य और फेस वैल्यू के बीच का अंतर निवेशक की कमाई का प्रतिनिधित्व करता है।
टी-बिल्स की मुख्य विशेषताएँ (Key Features of T-Bills):
- परिपक्वता अवधि (Maturity Periods): सामान्य परिपक्वता 91 दिन, 182 दिन, और 364 दिन होती है।
- कोई नियमित ब्याज नहीं (No Periodic Interest): टी-बिल्स ज़ीरो-कूपन (zero-coupon) उपकरण होते हैं; निवेशक पूंजी प्रशंसा के माध्यम से कमाते हैं।
- उच्च तरलता (High Liquidity): ये अत्यधिक तरल होते हैं और मनी मार्केट (money market) में सक्रिय रूप से ट्रेड किए जाते हैं।
- कम जोखिम (Low Risk): सरकार द्वारा समर्थित, टी-बिल्स सबसे सुरक्षित निवेशों में से माने जाते हैं।
उदाहरण (Example):
मान लो सरकार एक 91-दिन का टी-बिल ₹1,00,000 के फेस वैल्यू पर ₹98,000 की रियायती कीमत पर जारी करती है। परिपक्वता पर, निवेशक ₹1,00,000 प्राप्त करता है, ₹2,000 की कमाई करता है।
टी-बिल्स क्यों महत्वपूर्ण हैं? (Why Are T-Bills Important?)
- कैश प्रबंधन (Cash Management): सरकारें अल्पकालिक नकदी प्रवाह आवश्यकताओं और तरलता को प्रबंधित करने के लिए टी-बिल्स का उपयोग करती हैं।
- निवेश उपकरण (Investment Tool): निवेशक टी-बिल्स का उपयोग कम जोखिम, अल्पकालिक निवेश विकल्प के रूप में करते हैं।
- बेंचमार्क दर (Benchmark Rates): टी-बिल्स पर यील्ड्स (yields) अक्सर अर्थव्यवस्था में अन्य अल्पकालिक ब्याज दरों के लिए बेंचमार्क दर के रूप में कार्य करती हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India - RBI) नीलामियों के माध्यम से टी-बिल्स जारी करता है, और वे देश के मनी मार्केट का एक आवश्यक हिस्सा बनाते हैं। कॉर्पोरेट्स, बैंक, और म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) आमतौर पर अल्पकालिक तरलता प्रबंधन के लिए टी-बिल्स में निवेश करते हैं।
ट्रेजरी बिल्स निवेशकों को सुरक्षित, अल्पकालिक निवेश विकल्प प्रदान करते हैं, जो तरलता और सुरक्षा प्रदान करते हैं। वे निश्चित आय बाजार में बुनियादी उपकरण होते हैं, विशेष रूप से अल्पकालिक फंड्स के प्रबंधन के लिए। अगले अध्याय में, हम फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट्स (fixed income investments) में क्रेडिट रिस्क (credit risk) पर चर्चा करेंगे, जिसमें डिफॉल्ट (default) का जोखिम और कैसे यह बॉन्ड इन्वेस्टिंग (bond investing) को प्रभावित करता है।
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