
Chapter 5 | 5 min read
वेजिस (wedges), फ्लैग्स (flags), और पेनेंट्स (pennants)
तकनीकी विश्लेषण में, वेजेज (wedges), फ्लैग्स (flags), और पेनंट्स (pennants) लोकप्रिय चार्ट पैटर्न्स होते हैं जो बाज़ार में संभावित कंटिन्यूएशन (continuation) या रिवर्सल (reversal) का संकेत देते हैं। ये पैटर्न्स ट्रेडर्स को ब्रेकआउट होने से पहले के कंसोलिडेशन पीरियड्स को पहचानने में मदद करते हैं, जिससे वे भविष्य की कीमतों की मूवमेंट्स का अनुमान लगा सकते हैं। जबकि इन पैटर्न्स में कुछ समानताएं हैं, प्रत्येक पैटर्न की विशिष्ट विशेषताएं हैं जो इसे विभिन्न बाजार स्थितियों में उपयोगी बनाती हैं।
इस चैप्टर में, हम वेज (wedge), फ्लैग (flag), और पेनंट (pennant) पैटर्न्स का विश्लेषण करेंगे, समझाएंगे कि ये कैसे काम करते हैं, और उदाहरण देंगे कि ट्रेडर्स कैसे इन्हें अपनी ट्रेडिंग स्ट्रेटेजीज़ में लागू कर सकते हैं। चलिए वेजेज (wedges) से शुरू करते हैं, जो दोनों कंटिन्यूएशन और रिवर्सल का संकेत दे सकते हैं।
1. वेजेज: रिवर्सल या कंटिन्यूएशन पैटर्न्स
वेजेज (wedges) चार्ट पैटर्न्स होते हैं जो तब बनते हैं जब कीमत एक कंवर्जिंग रेंज के भीतर मूव करती है, जिससे एक वेज-शेप्ड स्ट्रक्चर बनता है। वेजेज राइजिंग (rising) या फॉलिंग (falling) हो सकते हैं और ट्रेंड में उनकी स्थिति के आधार पर या तो कंटिन्यूएशन (continuation) या रिवर्सल (reversal) का संकेत देते हैं।
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राइजिंग वेज (rising wedge): एक बेयरिश पैटर्न (bearish pattern) जो अपट्रेंड या डाउनट्रेंड के दौरान बनता है, जहां कीमत अधिक ऊँचाइयाँ और अधिक निचाइयाँ बनाती है, लेकिन ऊँचाइयों की ढलान निचाइयों की ढलान से कम होती है। यह कमजोर होती गति को इंगित करता है, और कीमत के टूटने की उम्मीद होती है।
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फॉलिंग वेज (falling wedge): एक बुलिश पैटर्न (bullish pattern) जो डाउनट्रेंड या अपट्रेंड के दौरान बनता है, जहां कीमत कम ऊँचाइयाँ और कम निचाइयाँ बनाती है, लेकिन निचाइयों की ढलान ऊँचाइयों की ढलान से कम होती है। यह कमजोर होती बिक्री दबाव को इंगित करता है, और कीमत के ऊपर की ओर टूटने की उम्मीद होती है।
वेज पैटर्न को कैसे पहचानें?
- राइजिंग वेज (rising wedge): उच्च ऊँचाइयाँ और उच्च निचाइयाँ, लेकिन कीमत एक तंग रेंज में कंवर्ज कर रही है।
- फॉलिंग वेज (falling wedge): कम ऊँचाइयाँ और कम निचाइयाँ, और कीमत वेज आकार में संकीर्ण हो रही है।
- कंवर्जिंग ट्रेंडलाइन्स से एक ब्रेकआउट की तलाश करें, राइजिंग वेज के लिए नीचे की ओर या फॉलिंग वेज के लिए ऊपर की ओर।

राइजिंग और फॉलिंग वेज पैटर्न (rising and falling wedge pattern) का संदर्भ
वेज (wedges) एक संभावित ब्रेकआउट (breakout) का संकेत देते हैं, और ट्रेडर्स (traders) अक्सर ब्रेकआउट की पुष्टि होने के बाद पोजीशन (position) में प्रवेश करते हैं। आइए देखें कि यह एक वास्तविक उदाहरण के साथ कैसे काम करता है।
उदाहरण: टाटा मोटर्स (Tata Motors) में राइजिंग वेज (rising wedge)

इमेज कर्टसी: ट्रेडिंगव्यू
कल्पना कीजिए कि Tata Motors कई हफ्तों से अपट्रेंड में है, और एक राइजिंग वेज (rising wedge) पैटर्न बना रहा है क्योंकि कीमतें उच्च शिखर और उच्च निम्न स्तर बना रही हैं। हालांकि, शिखर उतने तीव्र नहीं हैं जितने निम्न स्तर हैं, जिससे एक वेज पैटर्न बनता है जो मजबूती के संकेत देता है। अंततः, कीमत वेज की उच्च ट्रेंडलाइन के ऊपर टूटती है, जिससे एक बुलिश ट्रेंड की पुष्टि होती है। इस बिंदु पर ट्रेडर्स स्टॉक को बाय (buy) करने पर विचार कर सकते हैं।
अब, चलिए फ्लैग्स (flags) का अन्वेषण करते हैं, जो क्लासिक कंटिन्यूएशन पैटर्न्स हैं जो वर्तमान ट्रेंड के पुनः शुरू होने का संकेत देते हैं।
2. फ्लैग्स: क्लासिक कंटिन्यूएशन पैटर्न्स (Flags: Classic Continuation Patterns)
फ्लैग्स (flags) शॉर्ट-टर्म कंटिन्यूएशन पैटर्न्स (continuation patterns) होते हैं जो एक अस्थायी कंसोलिडेशन फेज को इंगित करते हैं, इससे पहले कि कीमत वर्तमान ट्रेंड की दिशा में जारी रहती है। ये तब बनते हैं जब कीमत एक तेज़ मूवमेंट (जिसे फ्लैगपोल कहते हैं) का अनुभव करती है, इसके बाद एक संक्षिप्त अवधि का साइडवेज़ या स्लोपिंग मूवमेंट होता है जो एक झंडे जैसा दिखता है।
- बुलिश फ्लैग (bullish flag): एक अपट्रेंड के दौरान बनता है, जहां कीमत एक डाउनवर्ड या साइडवेज़ चैनल में कंसोलिडेट होती है, इससे पहले कि यह ऊपर की ओर ब्रेकआउट करती है।
- बेयरिश फ्लैग (bearish flag): एक डाउनट्रेंड के दौरान बनता है, जहां कीमत एक अपवर्ड या साइडवेज़ चैनल में कंसोलिडेट होती है, इससे पहले कि यह नीचे की ओर टूटती है।
फ्लैग पैटर्न को कैसे पहचानें?
- एक फ्लैगपोल (flagpole) एक तीव्र कीमत मूवमेंट द्वारा बनाया जाता है, या तो ऊपर की ओर या नीचे की ओर।
- फ्लैग (flag) तब बनता है जब कीमत एक पैरलल या स्लोपिंग चैनल में कंसोलिडेट होती है, जो अक्सर फ्लैगपोल की दिशा के विपरीत होती है।
- फ्लैग से ब्रेकआउट ट्रेंड की कंटिन्यूएशन की पुष्टि करता है, या तो एक बुलिश फ्लैग के लिए ऊपर की ओर या एक बेयरिश फ्लैग के लिए नीचे की ओर।

Reference of Flag
फ्लैग्स (flags) उन ट्रेडर्स (traders) के लिए आदर्श होते हैं जो ट्रेंड कंटिन्यूएशन्स (trend continuations) पर कैपिटलाइज (capitalise) करना चाहते हैं। चलिए देखते हैं कि बुलिश फ्लैग (Bullish Flag) स्टॉक मार्केट (stock market) में कैसे काम कर सकता है।
Example: बुलिश फ्लैग (Bullish Flag) इन रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries)

Image Courtesy: Tradingview
मान लो Reliance Industries में एक तेज़ वृद्धि होती है, जिससे एक फ्लैगपोल (flagpole) बनता है। तेज़ वृद्धि के बाद, प्राइस एक डाउनवर्ड-स्लोपिंग चैनल में कंसोलिडेट होता है, जिससे एक बुलिश फ्लैग (bullish flag) बनता है। जब प्राइस फ्लैग की अपर ट्रेंडलाइन को ब्रेक करता है, तो यह अपट्रेंड के कंटिन्यूएशन की पुष्टि करता है। ट्रेडर्स इस पॉइंट पर खरीद (buy) की ओर देख सकते हैं, आगे के लाभ की उम्मीद में।
जहाँ फ्लैग्स (flags) पैरेलल चैनल से पहचाने जाते हैं, वहीं पेनेन्ट्स (pennants) समान पैटर्न होते हैं लेकिन एक कंवर्जिंग रेंज के साथ, जिसे हम अगले में देखेंगे।
3. पेनेन्ट्स (Pennants): फ्लैग पैटर्न का एक वेरिएशन (Variation)
पेनेन्ट्स (pennants) भी कंटिन्यूएशन पैटर्न्स (continuation patterns) होते हैं, फ्लैग्स की तरह, लेकिन एक विशिष्ट त्रिकोणीय आकार के साथ। ये तब बनते हैं जब प्राइस एक मजबूत प्राइस मूवमेंट (फ्लैगपोल) के बाद कंवर्जिंग रेंज में कंसोलिडेट होता है। फ्लैग्स के विपरीत, जिनकी पैरेलल ट्रेंडलाइन्स होती हैं, पेनेन्ट्स की कंवर्जिंग ट्रेंडलाइन्स होती हैं जो एक पॉइंट पर मिलती हैं, बिलकुल एक सिमेट्रिकल ट्रायएंगल (symmetrical triangle) की तरह।
- बुलिश पेनेन्ट (Bullish Pennant): एक अपट्रेंड के दौरान बनता है, जो प्राइस के ऊपर की ओर मूवमेंट के फिर से शुरू होने से पहले एक पॉज का संकेत देता है।
- बेयरिश पेनेन्ट (Bearish Pennant): एक डाउनट्रेंड के दौरान बनता है, जो प्राइस के नीचे की ओर मूवमेंट के फिर से शुरू होने से पहले एक छोटे कंसोलिडेशन का संकेत देता है।
पेनेन्ट पैटर्न कैसे पहचाने?
- एक फ्लैगपोल (flagpole) एक तेज़ प्राइस मूवमेंट द्वारा बनता है, चाहे वह ऊपर की ओर हो या नीचे की ओर।
- पेनेन्ट (Pennant) तब बनता है जब प्राइस कंवर्जिंग रेंज के भीतर कंसोलिडेट होता है, एक त्रिकोणीय आकार बनाते हुए।
- पेनेन्ट से ब्रेकआउट ट्रेंड के कंटिन्यूएशन की पुष्टि करता है, या तो बुलिश पेनेन्ट के लिए ऊपर की ओर या बेयरिश पेनेन्ट के लिए नीचे की ओर।

Reference of Pennant Flag
Pennants अक्सर मौजूदा ट्रेंड (trend) की मजबूत कंटिन्युएशन (continuation) का संकेत देते हैं, जो ट्रेडर्स (traders) के लिए आकर्षक पैटर्न (patterns) बनाते हैं। चलिए देखते हैं कि ट्रेडर्स (traders) बेयरिश पेनेंट्स (bearish pennants) का कैसे उपयोग करते हैं।
Example: बेयरिश पेनेंट (bearish pennant) in Infosys

Image Courtesy: Tradingview
Imagine TCS एक डाउनट्रेंड में है और एक तेज गिरावट का सामना कर रहा है, जिससे एक फ्लैगपोल (flagpole) बनता है। इस गिरावट के बाद, प्राइस एक कन्वर्जिंग रेंज में कंसोलिडेट होता है, जिससे एक बेयरिश पेनन्ट (bearish pennant) बनता है। जब प्राइस लोअर ट्रेंडलाइन के नीचे टूटता है, तो यह डाउनट्रेंड की कंटिन्युएशन की पुष्टि करता है। ट्रेडर्स इस पॉइंट पर एक शॉर्ट पोजिशन (short position) एंटर कर सकते हैं, उम्मीद करते हुए कि और गिरावट होगी।
वेजेज, फ्लैग्स, और पेनन्ट्स की पुष्टि (Confirming Wedges, Flags, and Pennants)
हालांकि वेजेज (wedges), फ्लैग्स (flags), और पेनन्ट्स (pennants) मजबूत संकेत देते हैं, ट्रेडर्स अक्सर ट्रेड एंटर करने से पहले अतिरिक्त पुष्टि की तलाश करते हैं। यहाँ कुछ सामान्य मेथड्स हैं:
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वॉल्यूम (volume): इन पैटर्न्स से ब्रेकआउट के दौरान बढ़ता वॉल्यूम मूव की स्ट्रेंथ की पुष्टि करता है। वेजेज के लिए, एक राइजिंग वेज से ब्रेकडाउन या एक फॉलिंग वेज से ब्रेकआउट पर हाई वॉल्यूम आत्मविश्वास बढ़ाता है। फ्लैग्स और पेनन्ट्स के लिए, ब्रेकआउट के दौरान वॉल्यूम स्पाइक्स एक मजबूत कंटिन्युएशन इंगित करते हैं।
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मूविंग एवरेजेस (moving averages): एक की मूविंग एवरेज (जैसे 50-दिन या 200-दिन का मूविंग एवरेज) के ऊपर या नीचे ब्रेकआउट पैटर्न की पुष्टि जोड़ता है।
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आरएसआई (RSI - Relative Strength Index): RSI ब्रेकआउट्स की पुष्टि करने में मदद कर सकता है। यदि RSI ब्रेकआउट के दौरान ओवरबॉट (overbought) या ओवर्सोल्ड (oversold) कंडीशंस दिखा रहा है, तो यह पैटर्न के अनुसार सिग्नल को मजबूत या कमजोर कर सकता है।
ट्रेडर्स इन पैटर्न्स का उपयोग कैसे करते हैं? (How Traders Use These Patterns?)
ट्रेडर्स वेजेज (wedges), फ्लैग्स (flags), और पेनन्ट्स (pennants) का उपयोग कंटिन्युएशन (continuation) और रिवर्सल (reversal) ऑपर्च्युनिटीज (opportunities) की पहचान करने के लिए करते हैं। यहाँ बताया गया है कि वे आमतौर पर इन पैटर्न्स को कैसे ट्रेड करते हैं:
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वेजेज: ट्रेडर्स एक शॉर्ट पोजिशन में एंटर करते हैं जब प्राइस एक राइजिंग वेज के नीचे टूटता है या एक लॉन्ग पोजिशन में एंटर करते हैं जब प्राइस एक फॉलिंग वेज (falling wedge) के ऊपर टूटता है।
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फ्लैग्स: ट्रेडर्स आमतौर पर फ्लैग से ब्रेकआउट पर खरीदते (buy) या शॉर्ट (short) करते हैं, उम्मीद करते हुए कि ट्रेंड जारी रहेगा।
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पेनन्ट्स: ट्रेडर्स पोजिशन एंटर (enter a position) करते हैं पेनन्ट से ब्रेकआउट पर, या तो एक बुलिश सिचुएशन में खरीदते हैं या एक बेयरिश सिचुएशन में शॉर्ट करते हैं।
प्रत्येक मामले में, ट्रेडर्स फॉल्स ब्रेकआउट्स से बचाव के लिए स्टॉप-लॉस ऑर्डर्स सेट करते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
वेजेज, फ्लैग्स, और पेनन्ट्स तकनीकी विश्लेषण में आवश्यक टूल्स हैं, जो ट्रेडर्स को कंटिन्युएशन (continuation) और रिवर्सल पैटर्न्स (reversal patterns) में मूल्यवान इनसाइट्स प्रदान करते हैं। वेजेज कंटिन्युएशन और रिवर्सल दोनों को संकेत कर सकते हैं, जबकि फ्लैग्स और पेनन्ट्स आमतौर पर कंटिन्युएशन पैटर्न होते हैं जो प्रचलित ट्रेंड की पुनरारंभ की सूचना देते हैं।
वॉल्यूम एनालिसिस (volume analysis), मूविंग एवरेजेस (moving averages), और आरएसआई (RSI) जैसे टेक्निकल इंडिकेटर्स (technical indicators) का उपयोग करके, ट्रेडर्स ब्रेकआउट की स्ट्रेंथ की पुष्टि कर सकते हैं और अधिक सूचित ट्रेडिंग निर्णय ले सकते हैं। चाहे आप बुलिश या बेयरिश सिग्नल्स की तलाश कर रहे हों, ये पैटर्न मार्केट बिहेवियर में स्पष्ट और कार्रवाई योग्य इनसाइट्स प्रदान करते हैं।
अगले चैप्टर में, हम कप एंड हैंडल पैटर्न (Cup and Handle Pattern): ए क्लासिक बुलिश कंटिन्युएशन सिग्नल (a classic bullish continuation signal) का अन्वेषण करेंगे, जो ट्रेडर्स को एक फॉर्मेशन को पहचानने में मदद करता है जो एक कंसोलिडेशन पीरियड के बाद संभावित ऊपर की ओर ब्रेकआउट को इंगित करता है।
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