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फिक्स्ड इनकम: बॉन्ड्स (bonds), यील्ड्स (yields) और इंटरेस्ट रेट डायनामिक्स (interest rate dynamics) Logo Light Mode
Module 5
एडवांस्ड फिक्स्ड इनकम कॉन्सेप्ट्स (Advanced Fixed Income Concepts)
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Chapter 4 | 3 min read

कॉलएबल और पुटेबल बॉन्ड्स (Callable and Putable Bonds)

कल्पना करें कि आपने अपने दोस्त को पैसे उधार दिए हैं, लेकिन इस बार वे जल्दी पैसे मिलते ही आपको वापस करने के लिए तैयार हैं। दूसरी तरफ, आप चाहते हैं कि आपके पास भी यह विकल्प हो कि जब आपको कैश की ज़रूरत हो, तो आप अपने दोस्त से जल्दी पैसे वापस मांग सकें।

ये फ्लेक्सिबल अरेंजमेंट्स उन आइडियाज की व्याख्या करते हैं जो कॉलएबल (callable) और पुटएबल (putable) बॉन्ड्स के पीछे हैं - ये फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स (fixed income instruments) हैं जो जारीकर्ता या निवेशक को कुछ अधिकार प्रदान करते हैं ताकि वे बांड्स को मैच्योरिटी से पहले रिडीम या बेच सकें।

कॉलएबल बॉन्ड्स (callable bonds) जारीकर्ता को यह अधिकार देते हैं कि वे बांड को उसकी मैच्योरिटी डेट से पहले रिडीम कर सकें, आमतौर पर जब इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) कम हो जाते हैं। इससे जारीकर्ता को कर्ज को कम लागत पर रीफाइनेंस करने का अवसर मिलता है। हालांकि, यह फीचर निवेशकों के लिए एक रिस्क (risk) पेश करता है, जिन्हें उनका बांड जल्दी रिडीम हो सकता है और वे भविष्य के इंटरेस्ट पेमेंट्स खो सकते हैं।

  • जारीकर्ता क्यों कॉल करते हैं बांड्स: जब बाजार के इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) गिरते हैं, तो जारीकर्ता मौजूदा बांड्स को उच्च कूपन (coupon) के साथ कॉल कर सकते हैं और कम रेट्स पर कर्ज को फिर से जारी कर सकते हैं, जिससे उनके इंटरेस्ट खर्चों में कमी आती है।
  • निवेशक का जोखिम: निवेशकों को पुनर्निवेश जोखिम (reinvestment risk) का सामना करना पड़ता है क्योंकि उन्हें लौटाए गए प्रिंसिपल को फिर से कम मौजूदा दरों पर निवेश करना पड़ सकता है।

उदाहरण: रिलायंस इंडस्ट्रीज 8% कूपन पर एक कॉलएबल बांड जारी कर सकती है। यदि बाजार की दरें 6% तक गिर जाती हैं, तो रिलायंस बांड को जल्दी कॉल कर सकती है और कम दर पर रीफाइनेंस कर सकती है, जिससे उसके इंटरेस्ट कॉस्ट्स कम हो जाते हैं लेकिन निवेशकों को नई इन्वेस्टमेंट्स (investments) ढूंढने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

पुटएबल बॉन्ड्स (putable bonds) निवेशक को यह अधिकार देते हैं कि वे बांड को उसकी मैच्योरिटी से पहले एक पूर्वनिर्धारित मूल्य पर जारीकर्ता को वापस बेच सकें। यह फीचर निवेशकों को बढ़ती इंटरेस्ट रेट्स या खराब होती क्रेडिट क्वालिटी के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।

  • निवेशक का लाभ: निवेशक बांड को जारीकर्ता को वापस "पुट" कर सकते हैं, जिससे गिरती बांड कीमतों के एक्सपोजर को कम कर सकते हैं।
  • जारीकर्ता का दृष्टिकोण: जारीकर्ता आमतौर पर पुटएबल बॉन्ड्स पर एक कम कूपन रेट ऑफर करते हैं क्योंकि निवेशकों के पास यह अतिरिक्त सुरक्षा होती है।

उदाहरण: एक कॉरपोरेट बांड 7% कूपन के साथ 5 साल बाद पुटएबल हो सकता है। अगर इंटरेस्ट रेट्स बढ़ती हैं और बांड की कीमतें गिरती हैं, तो निवेशक बांड को पूर्व निर्धारित पुट प्राइस पर जारीकर्ता को बेच सकते हैं, जिससे नुकसान की भरपाई हो सकती है।

  1. लचीलापन: ये बांड्स जारीकर्ता और निवेशकों को इंटरेस्ट रेट और लिक्विडिटी रिस्क (liquidity risk) को मैनेज करने में लचीलापन देते हैं।
  2. प्राइसिंग पर प्रभाव: कॉलएबल बॉन्ड्स (callable bonds) आमतौर पर निवेशकों को कॉल रिस्क (call risk) के लिए मुआवजा देने के लिए उच्च यील्ड्स (yields) ऑफर करते हैं, जबकि पुटएबल बॉन्ड्स (putable bonds) निवेशक सुरक्षा के कारण कम यील्ड्स ऑफर करते हैं।
  3. रिस्क मैनेजमेंट: इन फीचर्स को समझने से निवेशकों को रिस्क-रिटर्न ट्रेड-ऑफ को सही से आंकने में मदद मिलती है।

कॉलएबल और पुटएबल बॉन्ड्स का भारत में तेजी से उपयोग हो रहा है, खासकर उन कॉरपोरेशन्स द्वारा जो फ्लेक्सिबल फाइनेंसिंग ऑप्शंस की तलाश में हैं और उन निवेशकों द्वारा जो टेलर्ड रिस्क प्रोफाइल्स की तलाश में हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने कॉलएबल बॉन्ड्स जारी किए हैं, और कई भारतीय कंपनियों ने अपने कर्ज प्रस्तावों में इन फीचर्स को शामिल किया है।

कॉलएबल और पुटएबल बॉन्ड्स फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टिंग में महत्वपूर्ण लचीलापन जोड़ते हैं, लेकिन निवेशकों को इनमें निहित रिस्क्स और रिवार्ड्स को समझना आवश्यक है। इन फीचर्स को पहचानने से अधिक सूचित निवेश निर्णय लेने में मदद मिलती है। अगले अध्याय में, हम जीरो-कूपन बॉन्ड्स और स्ट्रिप्स (zero-coupon bonds and strips) की खोज करेंगे, जो अनोखे बॉन्ड्स हैं जो नियमित इंटरेस्ट नहीं देते लेकिन अलग निवेश अवसर प्रदान करते हैं।

This content has been translated using a translation tool. We strive for accuracy; however, the translation may not fully capture the nuances or context of the original text. If there are discrepancies or errors, they are unintended, and we recommend original language content for accuracy.

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