
Chapter 4 | 1 min read
आंतरिक (Intrinsic) बनाम सापेक्ष मूल्यांकन (Relative Valuation)
जब आप मुंबई में एक फ्लैट खरीदते हैं, तो आप आमतौर पर दो चीजें करते हैं। पहले, आप फ्लैट की स्थिति की जांच करते हैं — उसकी कंस्ट्रक्शन क्वालिटी, लेआउट, मेंटेनेंस — यह समझने के लिए कि यह वास्तव में खरीदने लायक है या नहीं। दूसरा, आप उसी लोकलिटी में समान फ्लैट्स की कीमतों की तुलना करते हैं ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि आप ज्यादा भुगतान नहीं कर रहे हैं। यह सरल प्रॉपर्टी-खरीदने का व्यवहार कंपनी वैल्यूएशन के दो प्रमुख तरीकों को पूरी तरह से दर्शाता है: इंट्रिंसिक वैल्यूएशन (intrinsic valuation) और रिलेटिव वैल्यूएशन (relative valuation)।
इंट्रिंसिक वैल्यूएशन (Intrinsic Valuation) पूरी तरह से कंपनी की मौलिक विशेषताओं पर केंद्रित होता है, बिना इस बात के प्रभावित हुए कि अन्य कंपनियों का मूल्यांकन कैसे किया गया है। यह फ्लैट का पूरी तरह निरीक्षण करने जैसा है, इसकी संरचना, फिटिंग्स, और कंस्ट्रक्शन क्वालिटी का मूल्यांकन करना। निवेशक बिजनेस की भविष्य में कैश फ्लो जनरेट करने की क्षमता, उसकी बैलेंस शीट की मजबूती, उसके प्रोडक्ट्स की ग्रोथ पोटेंशियल, और उसकी मैनेजमेंट क्वालिटी पर ध्यान देते हैं। सबसे लोकप्रिय इंट्रिंसिक वैल्यूएशन मेथड डिस्काउंटेड कैश फ्लो (DCF) एनालिसिस (discounted cash flow analysis) है, जहां भविष्य के कैश फ्लो का अनुमान लगाया जाता है और उन्हें वर्तमान मूल्य पर डिस्काउंट किया जाता है। यह मेथड यह सवाल उठाता है, “यह बिजनेस अपनी खुद की गुणवत्ता के आधार पर कितना मूल्यवान है?”
रिलेटिव वैल्यूएशन (Relative Valuation), दूसरी ओर, एक कंपनी की तुलना उसके साथियों या प्रतिस्पर्धियों के साथ करता है। यह यह जांचने जैसा है कि उसी पड़ोस के अन्य फ्लैट्स की कीमतें क्या हैं, यह तय करने से पहले कि आप कितना भुगतान करने के लिए तैयार हैं। यहां, कंपनी का मूल्यांकन P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) रेशियो, P/B (प्राइस-टू-बुक) रेशियो, या EV/EBITDA मल्टीपल जैसी मेट्रिक्स का उपयोग करके किया जाता है, जो उसी सेक्टर की समान कंपनियों के सापेक्ष होते हैं। यह दृष्टिकोण यह सवाल उठाता है, “क्या यह बिजनेस दूसरों की तुलना में सस्ता या महंगा है?”
उदाहरण: मान लीजिए इन्फोसिस लिमिटेड। इंट्रिंसिक वैल्यूएशन में इसके फ्यूचर कैश फ्लो का अनुमान लगाना शामिल होगा, जो इसके कॉन्ट्रैक्ट्स, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स, कॉस्ट स्ट्रक्चर, और मैनेजमेंट क्षमता पर आधारित होगा। वहीं, रिलेटिव वैल्यूएशन इन्फोसिस के P/E रेशियो की तुलना TCS, विप्रो, और HCL टेक से करेगा ताकि यह तय किया जा सके कि इन्फोसिस अपने साथियों के मुकाबले सही से मूल्यांकित है या नहीं।
मुख्य अंतर (Key Differences):
आधार (Basis) | कंपनी की अपनी मौलिक विशेषताएं | साथियों के साथ तुलना |
जटिलता (Complexity) | विस्तृत, डेटा-प्रेरित | सरल और तेज |
उद्देश्य (Objective) | सच्चे स्टैंडअलोन मूल्य का पता लगाना | समान व्यवसायों के साथ बेंचमार्क करना |
नोट: कोई भी दृष्टिकोण अकेले परफेक्ट नहीं होता। इंट्रिंसिक वैल्यूएशन ग्रोथ रेट्स और डिस्काउंट रेट्स जैसी धारणाओं पर अत्यधिक संवेदनशील हो सकता है। रिलेटिव वैल्यूएशन बाजार की स्थितियों पर निर्भर करता है और हमेशा कंपनी की वास्तविक गुणवत्ता को प्रतिबिंबित नहीं कर सकता।
स्मार्ट निवेशक अक्सर दोनों तरीकों को एक साथ उपयोग करते हैं। इंट्रिंसिक वैल्यूएशन आपको बताता है कि कंपनी वास्तव में कितनी मूल्यवान है; रिलेटिव वैल्यूएशन आपको बताता है कि बाजार समान व्यवसायों की कीमत कैसे लगा रहा है। अगले अध्याय में, हम शक्तिशाली डिस्काउंटेड कैश फ्लो (DCF) एनालिसिस (discounted cash flow analysis) मेथड में गहराई से जाएंगे — इंट्रिंसिक वैल्यूएशन के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड।
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